Header Ads Widget

देख भाई देख

Ticker

5/recent/ticker-posts

एक कदम सनातन की ओर- रामनवमी और महानवमी - क्या फर्क है ????????????????

 



वर्तमान में चैत्र नवरात्रि चल रही है और 17 अप्रैल को रामनवमी है। इसी दिन महानवमी भी है। नवरात्रि जहां माँ दुर्गा का पर्व है, वहीं रामनवमी भगवान् राम का। ऐसे में कई लोग ये समझ नहीं पाते कि इन दोनों अवसरों को एक साथ क्यों मनाया जाता है क्योंकि ये दोनों दो अलग-अलग देवी-देवता को समर्पित है और साथ में ये भी कि रामनवमी और महानवमी फर्क क्या है, तो चलिए बढ़ाते है एक कदम अपने सनातन की ओर ...

17 अप्रैल 2024 का दिन बेहद खास है, न केवल इस लिहाज से कि इस दिन रामनवमी और महानवमी है बल्कि इस लिहाज से भी इस बार अयोध्या के राम मंदिर में पहली बार बेहद खास तरीके से रामलला का जन्मोत्सव  मनाया जाएगा। अयोध्या मे होने वाले आयोजन से पहले हम  ये जानते हैं कि रामनवमी और महानवमी में फर्क क्या है और इनको मानाने के पीछे का कारण  है.-----------------------



रामनवमी का त्यौहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इस दिन भगवान् राम का जन्म हुआ था। भगवान् राम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। उनका जन्म त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था और वे ‘इक्ष्वाकु वंश’ से संबंधित हैं। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमीं तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में कौशल्या देवी ने श्रीराम को जन्म दिया था। वाल्मीकि लिखते हैं कि जिस समय भगवान श्रीराम का जन्म हुआ उस समय पाँचों ग्रह उच्चतम स्थिति में मौजूद थे।इसलिए रामनवमी, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हर वर्ष मनाया जाता है, जिस दिन महानवमी भी पड़ती है। 



    भगवान राम की ही तरह, मां दुर्गा की पूजा का भी अत्यंत महत्व है। महानवमी, नवरात्रि के नौ दिनों के अंत में मनाई जाती है और यह अवसर देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है। रामनवमी पर भगवान राम की पूजा की जाती है, जबकि महानवमी पर मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरुप की पूजा की जाती है। रामनवमी के लिए इस दिन भगवान् राम की पूजा, उनसे जुड़े राम चरित मानस और राम गीता इत्यादि के पाठ कराये जाते हैं, जबकि महानवमी पर व्रत का पारण करके कन्याओं को भोजन कराया जाता है। रामनवमी में दिन में पूजा का महत्व है और इस बार इसका शुभ मुहूर्त सूर्योदय से लेकर दोपहर के 2 .14 मिनट तक है। रात में महानवमी पूजा का महत्व है, खासकर प्रदोष काल और नीशीथ काल में। 

अब चलिए जानते है अयोध्या में रामनवमी के धूम के बारे में 

 अयोध्या में  रामनवमी इस बार बहुत खास होगी क्योंकि वहाँ के राम मंदिर में प्रभु के विराजित होने के बाद पहली बार रामलला का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके लिए बहुत ही खास तैयारियां की गयी हैं। सूर्य भगवन की करने प्रभु का तिलक करेगी जो देखने लायक ही होगा, जिसका ट्रायल भी करके देख लिया गया है। इस बार अयोध्या में राम नवमी का त्योहार 500 साल के सघर्षो की जीत के बाद मनाया जाएगा, जिसमें रामनवमी के दिन दोपहर में ठीक 12 बजे सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी, जिससे उनका सूर्य तिलक होगा। यह गोलाकार सूर्य तिलक 75 मिमी का होगा और यह खास तैयारी दो दर्पण एक लेंस की मदद से किया जाएगा। राम नवमी में दोपहर में यह भव्य दृश्य देखने मिलेगा जिससे जनमानस तृप्त हो उठेगा। इस उत्सव पर हमारे प्रभु भगवान् राम के लिए विशेष पोशाक भी तैयार किये गए हैं और विश्वास है की इस पल को सभी भक्त अपने आँखों में बसना चाहेंगे, इसके लिए 100 बड़ी एलईडी की भी व्यवस्था की गयी है। प्रभु को इस उत्सव में 56 प्रकार के भोग लगाए जायेंगे।  

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ