भगवान गौरीशंकर, चौसठ योगिनी मंदिर जबलपुर
मध्यप्र्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध गौरीशंकर चौसठयोगिनी मंदिर जहा पर महादेव और माता पार्वती के दर्शन का विशेष महत्त्व है। मंदिर का निर्माण 10वीं सदी में हुआ था। इतिहासकारों बताते हैं कि त्रिपुरी के कल्चुरी शासक युवराजदेव ने राज्य के विस्तार के लिए योगिनियों का आशीर्वाद लेने के उद्देश्य से इसका निर्माण करवाया जिसमें मुख्य मंदिर के घेरे में चौसठयोगिनी की प्रतिमाएं हैं। तंत्र साधना का केंद्र माना जाने वाला यह मंदिर नर्मदा नदी के किनारे है। नवरात्रि में । वैसे तो दुनियाभर में बहुत से 64योगिनी मंदिर है, परंतु उनमें से यह तांत्रिक गुप्त साधना के लिए एक विशेष स्थान रखता है। मंदिर को लेकर मान्यता भी है। कहा जाता है कि भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती भ्रमण पर निकले थे। वे भेड़ाघाट में ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचे। वहां सुवर्ण ऋषि तपस्या कर रहे थे। भगवान के दर्शन पाकर वे बोले. हे देवाधिदेव! आपके दर्शन से तपस्या सफल हो गई। जीवन में कोई अभिलाषा नहीं रही। एक प्रार्थना है कि जब तक मैं नर्मदा पूजन कर न लौट न आऊंए तब तक आप यहीं ठहरें।


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